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अध्याय 17

अध्याय 17

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सभी के दिल दहल गए, उन्हें लगा मानो किसी ने जोर से मारा हो। "फिर से ज्ञान प्राप्त कर लिया, क्या लोगों को जीने भी दोगे?"किसने कहा था कि वह बेकार है, मैं उससे जान की बाजी लगा दूंगा। यह बंदा तो वाकई एक विलक्षण प्रतिभा है।" कुलीन शिष्यों को तो शांत सुख'आन की इस समझ से चक्कर आ गए थे।

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