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अध्याय 18

अध्याय 18

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“जब मैं गई थी, वो सिर्फ 6 साल का था, उस वक्त उसका चेहरा गोल-मटोल था, शरीर मोटा-ताज़ा, प्यारा किसी मिट्टी की गुड़िया की तरह, तब वो… अब छोटा-सा मुला-सा कैसे हो गया? बहन, तुम जरूर मुझसे झूठ बोल रही हो, है ना? ये सच नहीं हो सकता…“ औरत की आवाज कांप रही थी, उसमें एक उम्मीद और मिन्नत का भाव था, जैसे वो लाल-कुर्ती वाली औरत से पूछ रही हो, या फिर किस्मत से। उसकी आँखें सूनी थीं, दिमाग में बच्चे की पुरानी सूरत बार-बार उभर रही थी, और अभी सुनी गई “छोटी मूली” की छवि से उसका कड़ा फर्क था, जिससे वो किसी भी हाल में इस हकीकत को स्वीकार नहीं कर पा रही थी। लाल-कुर्ती वाली औरत, यानी लिन शुए, थोड़ी देर चुप रही, उसका दिल उलझन और दर्द से भरा था।

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